Wednesday, June 25, 2008

कौन कहता है कि वो हमारे साथ नहीं,
कौन कहता है कि वो हमारे पास नहीं,
देखने के लिए तो नज़र भर चाहिए बस,
वरना किसे पता कि खुदा भी होता है...
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क्या मंदिर क्या मस्जिद,
मुझ रहगुज़र के लिए तो तेरा तस्सवुर ही काफ़ी है...
लोग ढूंढते हैं गिरिजों औ शिवालों में रब को,
मेरे लिए तो आप ही रब हैं...
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जब हमने देखा तो तुम नहीं थे,
जो हमने सुना वो तुम नहीं थे,
पुकार कर देखा...
तब भी तुम नहीं थे,
पर फिर खुद को आईने में देखा...
तुम यहीं थे,
यहीं थे,
यहीं थे..
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जब हम ज़िन्दगी से निराश होते हैं,
तुझे याद कर लेते हैं,
सोचते हैं मुश्किलों से कैसे निकलें,
फिर तेरी मुस्कराहट महसूस कर लेते हैं,
गर फिर भी रह गयी कमी...
आँखें बंद कर तेरा दीदार कर लेते हैं...
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हम खुश रहते है ये सोच के
कि आप खुश हैं..
हम रो देते हैं ये जान के
कि आप उदास हैं..
ये और बात है कि ज़िन्दगी पर नाम हमारा लिखा है,
पर हमारे लिए इसे जीते तो आप हैं...

2 comments:

swati said...

You sound like one of those classic Hindi poets.. ( i have said this before!!) ..BTW it really needs brains and Hindi vocabulary most importantly(which most of people around don't have ) to write like this..
Miss Punya.. You Write Really Well ..
I am A Fan of your Hindi

punya said...

well well well.....I HV A FAN ....so soon..
zup!!